| Paper Title | ग्राम सभा का महत्व और चुनौतियां |
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| Author(s) | |
| Country | India |
| Abstract | सारांश भारतीय लोकतंत्र का दिल केवल दिल्ली के संसद भवन या राज्यों की विधानसभाओं में नहीं धङकता, बल्कि देश के 6 लाख से अधिक गांवों में बसने वाली ग्राम सभाओं में धङकता है। ग्राम सभा केवल स्थानीय शासन का एक अंग नहीं हैं, बल्कि यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र ;क्पतमबज क्मउवबतंबलद्ध का भारत में सबसे जीवंत और प्रत्यक्ष उदाहरण है। जहां लोकसभा और विधानसभाओं में नागरिक अपने प्रतिनिधियों(सांसदों और विधायकों) के माध्यम से शासन करते हैं, वहीं ग्रामसभा में गांव का हर एक मतदाता स्वयं निर्णय प्रक्रिया में भाग लेता है। ग्रामसभा पंचायती राज व्यवस्था की बुनियाद और ग्रामीण लोकतंत्र की आत्मा है। भारतीय संविधान के 73वें संशोधन(1992) के तहत ग्रामसभा को एक संवैधानिक संस्था का दर्जा दिया गया है, जो सीधे तौर पर गांव के नागरिकों को स्थानीय शासन में भागीदारी का अधिकार देती है। |
| Keywords | मुख्य शब्द- ग्रामसभा, सशक्तिकरण, प्रत्यक्ष लोकतंत्र, सहभागिता, सामाजिक न्याय आदि। |
| Subject Area | Sociology |
| Issue | JSECR,V.12, N.27 October-December 2026 |
| Published | 2026/10/29 |
| DOI | https://doi.org/10.68868/14Js15aK38 |
| How to Cite | रंजन, ड. अ. क. (2026). ग्राम सभा का महत्व और चुनौतियां. Journal of Socio-Educational & Cultural Research, 12(27). |