Paper Title असगर वजाहत के नाटकों में सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक चेतना
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Country India
Abstract समकालीन हिंदी नाटक में असगर वजाहत का रचनात्मक व्यक्तित्व सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदना, सांप्रदायिक सद्भाव और लोकतांत्रिक चेतना के कारण विशिष्ट महत्त्व रखता है। उन्होंने इतिहास, मिथक, धर्म, राजनीति और समकालीन सामाजिक जीवन से जुड़े प्रश्नों को नाटकीय अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए मनुष्य को अपनी रचना के केंद्र में रखा है। उनके जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई, गोडसे@गांधी.कॉम, ईश्वर-अल्लाह, समिधा, वीरगति, इन्ना की आवाज आदि नाटकों में सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता, राजनीतिक स्वार्थ, हिंसा, सामाजिक विषमता और मानवीय संबंधों के प्रश्न प्रमुखता से उभरते हैं। विशेष रूप से जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई में भारत-विभाजन की त्रासदी के बीच हिंदू-मुस्लिम संबंधों और साझा संस्कृति को केंद्र में रखा गया है। गोडसे@गांधी.कॉम में गांधी और गोडसे के वैचारिक द्वंद्व के माध्यम से हिंसा और अहिंसा, धर्म और राजनीति तथा राष्ट्र की अवधारणा पर प्रश्न उठाए गए हैं। ईश्वर-अल्लाह धार्मिक आस्था को मनुष्यता से जोड़ता है। इस प्रकार वजाहत का नाट्य-संसार सांप्रदायिक विभाजन के विरुद्ध मानवीय एकता तथा सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनता है।
Keywords असगर वजाहत, हिंदी नाटक, सांप्रदायिक सद्भाव, सामाजिक चेतना, धर्मनिरपेक्षता, मानवता, विभाजन, गांधी, इतिहास।
Subject Area Hindi
Issue JSECR,V.12, N.27 October-December 2026
Published 2026/10/29
DOI https://doi.org/10.68868/14Js15aK36
How to Cite कुमार, ड. म. (2026). असगर वजाहत के नाटकों में सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक चेतना. Journal of Socio-Educational & Cultural Research, 12(27).
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