Paper Title फणीश्वरनाथ रेणु की विचारधारा
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Country India
Abstract फणीश्वरनाथ रेणु का साहित्य भारतीय समाज, राजनीति और जनजीवन के अंतर्संबंधों का सशक्त दस्तावेज है। उनकी राजनीतिक विचारधारा किसी एक कठोर मतवाद की सीमा में बँधी हुई नहीं, बल्कि जीवनानुभव, जनसंघर्ष और मानवीय संवेदना से निर्मित हुई है। पारिवारिक संस्कारों, स्वतंत्रता आंदोलन, गांधीवादी प्रभाव, समाजवादी चिंतन तथा नेपाली क्रांति में सक्रिय भागीदारी ने उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को व्यापक आधार प्रदान किया। स्वतंत्रता के बाद सत्ता, दलगत स्वार्थ, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण से उनका मोहभंग भी हुआ, किंतु जनता और लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था समाप्त नहीं हुई। रेणु की राजनीतिक चेतना का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि सामान्य मनुष्य और उसके जीवन-संघर्ष हैं। उनके कथा-साहित्य में कांग्रेस, समाजवाद, गांधीवाद, सत्ता-संरचना और राजनीतिक अवसरवाद का आलोचनात्मक चित्रण इसी जनपक्षधर दृष्टि का परिणाम है। अतः रेणु की विचारधारा को समझने के लिए उनके जीवनानुभवों, राजनीतिक सक्रियता और साहित्यिक अभिव्यक्तियों का समग्र अध्ययन आवश्यक है।
Keywords राजनीतिक चेतना, जनपक्षधरता, समाजवादी विचारधारा, गांधीवादी चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्य, जनसंघर्ष, राजनीतिक सक्रियता, सत्ता-विरोधी चेतना, मानवीय दृष्टि
Subject Area Hindi
Issue JSECR,V.12, N.27 October-December 2026
Published 2026/10/29
DOI https://doi.org/10.68868/14Js15aK39
How to Cite अंसारी, ड. अ. (2026). फणीश्वरनाथ रेणु की विचारधारा. Journal of Socio-Educational & Cultural Research, 12(27).
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